सर्च से पहले तलाशी के वारंट की करें जांच

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लखनऊ : यूपी राज्य जीएसटी विभाग (वाणिज्य कर) के एसआइबी सर्वे को लेकर व्यापारियों में अनिश्चितता और भय की स्थिति है। लेकिन सर्च से पहले सर्च वारंट की जांच करनी चाहिए। सर्च वारंट में समुचित कारण उल्लेखित होने पर जांच संभव है। यह जानकारी सीए आलोक फरसैया, सीए प्रेम गुल व सीए सौरभ अग्रवाल ने दी। वह संजय प्लेस स्थित आइसीएआइ कार्यालय में हुई बैठक में जीएसटी से संबंधित वर्कशॉप को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि सर्च वारंट ज्वाइंट कमिश्नर या उनसे उच्च अधिकारी द्वारा जारी होना चाहिए। सर्च के उपरांत अंतिम कार्रवाई व्यापारी के कर निर्धारण अधिकारी को धारा 74 में करनी है, न कि सर्च करने वाले अधिकारी को। जीएसटी में गिरफ्तारी केवल दो करोड़ से अधिक करवंचन में संभव है वह भी कमिश्नर की अनुमति से। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि सीज माल के प्रपत्रों की एक कॉपी व्यापारी को उपलब्ध करानी होगी, ताकि वह अपना पक्ष विभाग के सामने रख सके। सचल दल अधिकारी अवमूल्यन एवं कर की दर का विवाद होने पर माल को सीज नहीं कर सकते। यह अधिकार कर निर्धारण अधिकारी का है। जीएसटी के आंकड़ों का आयकर के आंकड़ों से मिलान न होने पर व्यापारी पर नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे उसे परेशानी होगी।

व्यापारी रिफंड का आवेदन करने से पहले अपने सारे आंकड़ों को विधिवत जांच लें। गलत रिफंड होने पर व्यापारी को 24 फीसद ब्याज देना पड़ेगा और साथ में पेनल्टी भी। यदि किसी व्यापारी का कार्यक्षेत्र केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है, तो सर्च राज्य सरकार भी कर सकती है, जो व्यापारी के लिए तकलीफ का विषय है। अगर किसी व्यापारी का काम एक शहर से दूसरे शहर के बीच में पांच राज्यों से होकर जा रहा है, तो जिस राज्य में माल पकड़ा जाता है, उसी राज्य के अधिकारी द्वारा पेनल्टी लगाई जाएगी।

सोर्स : जागरण

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