बढ़ सकती है जीएसटी पेमेंट और जीएसटीआर-3बी की डेट

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नई दिल्ली : कोरोना वायरस के चलते तमाम तरह की बंदिशों का सामना कर रही ट्रेड और इंडस्ट्री को सरकार जीएसटी के भुगतान और मंथली रिटर्न (जीएसटीआर-3बी) की फाइलिंग में मोहलत दे सकती है।

हालांकि वित्त वर्ष के आखिर में इस तरह के एक्सटेंशन से सरकार के लिए राजस्व संबंधी चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं, लेकिन देशभर के टैक्सपेयर्स और प्रोफेशनल्स की ओर इसकी मांग जोर पकड़ती जा रही है।

होटल, एविएशन, रेस्टोरेंट, मॉल, सिनेमा, जिम, नाइट क्लब सहित कई तरह की सर्विसेज पर प्रतिबंधों के बाद जहां इन सेक्टर्स में कारोबार ठप है, वहीं सरकारी और गैर-सरकारी दफ्तरों में आवागमन प्रभावित होने से फाइलिंग प्रभावित हुई है।

सीबीआईसी के सूत्रों ने बताया कि सरकार जीएसटीआर-3बी की डेट 20 मार्च से बढ़ाकर 31 मार्च करने पर विचार कर रही है। एक अधिकारी ने यह भी कहा कि अभी तक यह तय नहीं है कि टैक्स पेमेंट में भी मोहलत मिलेगी।

हो सकता है कि टैक्स पेमेंट की डेडलाइन 20 मार्च ही रहे और रिटर्न की मोहलत दे दी जाए क्योंकि 31 मार्च तक केंद्र और राज्यों को अपना राजस्व लक्ष्य पूरा करना होता है और 1 अप्रैल से नए बजट का क्रियान्वयन भी शुरू करना होता है।

देशभर में 5 करोड़ से ऊपर टर्नओवर वालों के लिए जीएसटीआर-3बी फाइलिंग की डेट 20 मार्च है, जबकि इससे छोटे कारोबारियों के लिए दो समूहों में अलग-अलग डेट रखी गई है। दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब सहित ज्यादातर उत्तरी राज्यों के लिए डेट 24 मार्च है, जबकि साउथ और पश्चिमी राज्यों के लिए यह 22 मार्च है।

व्यापार और उद्योग संगठनों ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि मौजूदा हालात में टैक्स अनुपालन संभव नहीं है। टैक्स कंसल्टेंट सुधीर हालाखंडी ने बताया कि भीड़ से बचने और वर्क फ्रॉम होम जैसी एडवाइजरीज से कॉरपोरेट ही नहीं, सीए और एकाउंटेंट्स का काम भी प्रभावित हुआ है।

अगर डेट नहीं बढ़ी तो ज्यादातर टैक्सपेयर्स पर लेट फीस का बोझ बढ़ेगा। सरकार को कम से कम 31 मार्च तक बिना लेट फीस पेमेंट और फाइलिंग की छूट देनी चाहिए।

ऑल इंडिया टैक्स एडवोकेट फोरम के प्रेसिडेंट एम के गांधी ने कहा कि ट्रेड-इंडस्ट्री को सिर्फ GSTR-3B की फाइलिंग ही नहीं करनी है, लेट फीस के साथ वित्त वर्ष 2018-19 के इनकम टैक्स रिटर्न की आखिरी डेट 31 मार्च है, जबकि विवाद से विश्वास स्कीम के तहत 100 फीसदी विवादित टैक्स चुकाते हुए ब्याज और पेनाल्टी से बचने की डेडलाइन भी 31 ही है।

मौजूदा अफरातफऱी के माहौल में यह संभव नहीं है। टैक्स विभागों और अदालतों में भी एहतियातन पब्लिक डीलिंग बंद कर दी गई है।

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