जीएसटी की मुनाफाखोरी के खिलाफ शिकायत की प्रक्रिया का जल्द ही मानकीकरण होगा

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नई दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के तहत मुनाफाखोरी की शिकायतों का सिलसिला बढ़ रहा है और इसे देखते हुए विा मंत्रालय इन शिकायतों से निपटने के लिए जल्दी ही एक मानक संचालन प्रक्रिया लाने की तैयारी में है।

जीएसटी कानून के तहत सरकार ने कर में कमी का लाभ ग्राहकों तक न पहुंचाने वाले व्यवसायियों के विरुद्ध उपभोक्ताओं की शिकायतें दर्ज करने के लिए एक स्थायी समिति और स्क्रीनिंग कमेटी बनायी है। उसके सामने अब तक 170 शिकायतें आ चुकी हैं। जीएसटी पहली जुलाई 2017 को लागू किया गया।

प्राप्त शिकायतों में से 50 को आगे की जांच के लिए सुरक्षा महानिदेशालय (डीजी सेफ़गार्ड) को भेज दिया गया है और पांच की जांच शु्रू भी हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार डीजीएस के लिए बहुत बड़ी संख्या में शिकायतों की जांच कर उनकी रपट राष्ट्रीय मुनाफाखोरी निवारक प्राधिकरण (नापा) को भेज पाना व्यावहारिक नहीं होगा। कारण है कि नियमों के तहत रपट तीन माह के अंदर देना जरूरी है और ज्यादा से ज्यादा तीन माह का समय और लिया जा सकता है।

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सूत्रों के अनुसार इस स्थिति से निपटने के लिए विा मंत्रालय एक मानक संचालन प्रक्रिया एसओपी तैयार कर रहा है। इसमें स्थायी समिति और स्क्रीनिंग समित के लिए उपभोक्ताओं की शिकायतों से निपटने के लिए कुछ दिशानिर्देश होंगे।

जीएसटी में मुनाफाखोरी के खिलाफ मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत पहले स्थानीय स्तर की शिकायतों को स्क्रीनिंग समिति और राष्ट्रीय स्तर की शिकायतों को स्थायी समिति के समक्ष भेजा जाता है। ये समितियां ठोस आधार वाली शिकायतों को आगे जांच के लिए डीजीएस को भेजती हैं।

सूत्रों ने पीटीआई से कहा कि ग्राहकों की शिकायतों के शीघ्र निस्तारण के लिए एक मानक कार्वाई प्रक्रिया एसओपी तय की जा रही है। प्रयास यह है कि डीजीएस के पास केवल ठोस शिकायतें ही पहुंचें।

एसओपी में शिकायतों के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया भी तय की गयी होगी।

कानून के तहत डीजीएस की रपट पर मुनाफाखोरी प्राधिकरण दोषी इकाइयों पर जुर्माना लगाने के साथ साथ उनके लाइसेंस भी रद्द कर सकता है।

स्रोत: नवभारत


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