जीएसटी के बाद एक साल में 80 हजार करोड़ की कर चोरी

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नई दिल्ली : जीएसटी के बाद एक साल में 80 हजार करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई। वहीं जीएसटी विभाग (केंद्रीय जीएसटी और डीजीजीआई) ने वित्तीय वर्ष 2018-18 में 40 हजार 804 धोखाधड़ी के केस दर्ज किए और 2018 से जुलाई 2019 तक सवा लाख करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी।

केंद्र सरकार ने एक जुलाई, 17 को संविधान में 122 वें संशोधन विधेयक के जरिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू किया। इसे टैक्स सुधार में क्रांतिकारी कदम बताते हुए एक देश और एक टैक्स की बात कही थी। टैक्स सुधार के लिए उठाए गए इस कदम के चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय से दैनिक जागरण ने जीएसटी से कितना फायदा और नुकसान हुआ इस संबंध में आरटीआइ के जरिए 16 सितंबर 2019 को कुछ सवाल पूछे थे। वित्त मंत्रालय के जीएसटी विभाग की जनसूचना अधिकारी रंजना चौधरी ने आरटीआइ के तीन सवालों का जवाब दिया है।

उन्होंने बताया जीएसटी लगने के बाद साल 2018-19 में देश के सभी राज्यों में लगभग 80 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के मामले पकड़े गए। विभागीय अफसरों ने कर चोरी के मामले में कार्रवाई करते हुए 40,804 धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए।

यह तो केवल एक साल का आंकड़ा था, वहीं साल 2019 में जुलाई माह तक लगभग 23 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के मामले पकड़े गए। इन टैक्स चोरी के मामलों में 3,551 धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए।

वित्त मंत्रालय के जीएसटी विभाग से मिले यह आंकड़े हैरान करने वाले हैं।

आरटीआइ में मिली जानकारी के अनुसार साल 2017 में जीएसटी कानून लागू होने के बाद साल 2018 से जुलाई 2019 तक देश में लगभग सवा लाख करोड़ रुपये की कर चोरी हुई और टैक्स चोरी के मामले में देशभर में 44,355धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए।

हालांकि कर चोरी के मामले सामने आने के बाद सरकार ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं लेकिन, इन कदम का अभी धरातल पर ज्यादा असर नहीं दिखाई दे रहा है।

कर चोरी के मामलों में हुई वसूली
वित्त मंत्रालय ने कर चोरी के मामले में वसूली की भी कार्रवाई की है। जिसमें साल 2018-19 के वित्तीय वर्ष में लगभग तीस हजार करोड़ रुपये वसूले गए।

वहीं साल 2019 में मार्च से जुलाई माह के बीच में लगभग 54 सौ करोड़ रुपये की कर चोरी के मामलों में वसूली की गई।

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