एक्सपोर्टर्स को ई-वॉलेट में मिलेगा जीएसटी रिफंड, उसी से टैक्स भुगतान होगा सहज

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नई दिल्ली : जीएसटी काउंसिल की हाल ही में हुई मीटिंग में कई मुद्दों पर चर्चा हुई और इनमें एक महत्वपूर्ण योजना थी ई-वॉलेट की। वित्त मंत्रालय की इस स्कीम में एक्सपोर्टर्स को रिफंड की राशि उनके खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को खत्म कर इस राशि को ई-वॉलेट में ट्रांसफर किया जाएगा।

एक्सपोर्टर किसी सप्लायर से माल खरीदते समय टैक्स का भुगतान ई-वॉलेट से कर सकेंगे। इससे सप्लायर और एक्सपोर्टर, दोनों का काम आसान होगा। हालांकि, जीएसटी पोर्टल पर टेक्निकल मैकेनिज्म को पूरी तरह अपडेट करने में लगने वाले समय को देखते हुए फिलहाल, ई-वॉलेट स्कीम को 31 मार्च 2021 तक के लिए टाल दिया गया है।

दूसरी ओर, कुछ एक्सपोर्टर्स का कहना है कि ई-वॉलेट स्कीम से रिफंड की प्रक्रिया तो तेज हो जाएगी, लेकिन उस स्थिति में क्या होगा, जब चुकाए जाने वाले टैक्स की तुलना में रिफंड की राशि ज्यादा हो। कुछ एक्सपोर्टर्स का रिफंड बैलेंस वॉलेट में ज्यादा हो जाएगा तो उनके सामने लिक्विडिटी की दिक्कत खड़ी हो जाएगा।

जीएसटी के विशेषज्ञ सीए प्रदीप जैन के अनुसार ई-वॉलेट स्कीम से ज्यादातर एक्सपोर्टरों को फायदा होगा, क्योंकि उन्हें सप्लायर को टैक्स की राशि का भुगतान वॉलेट से एक क्लिक में करने में आसानी होगी। इसके अलावा, जीएसटी काउंसिल में कुछ अन्य निर्णय भी हुए हैं।

काउंसिल में ये हुए मुख्य निर्णय

एक्सपोर्टर को एडवांस ऑथोराइजेशन में प्री-इम्पोर्ट कंडीशन में ही छूट का नियम पूर्व में लागू किया गया था। बाद में जीएसटी काउंसिल ने इसे बदलकर सभी को छूट दे दी, लेकिन यह छूट सिर्फ 31 मार्च 2020 तक ही लागू थी।

उद्यमियों द्वारा लगातार की जा रही मांग को देखते हुए जीएसटी काउंसिल ने इसे 31 मार्च 2021 तक बढ़ा दिया है।

एक्सपोर्टर्स को एक निश्चित अनुपात में आईटीसी का रिफंड मिलता है, लेकिन इसमें एक वित्तीय वर्ष से दूसरे वित्तीय वर्ष के साथ नहीं लगाया जा सकता। इस नियम में अब राहत दी गई है।

उदाहरण के लिए वर्ष 2017-18 के रिफंड क्लेम करना चाहें, तो इसमें अप्रैल 2018 का रिफंड भी साथ में शामिल किया जा सकता है। यानि, दो फाइनेंशियल ईयर के रिफंड क्लेम किए जा सकते हैं।

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