जीएसटी रिटर्न में देरी पर ई-वे बिल ब्लॉक होगा : स्टेट टैक्स कमिश्नर

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स्टेट टैक्स कमिश्नर ने दिए विभाग के अधिकारियों को अधिक पावर 

इंदौर : लगातार दो महीने तक जीएसटी के रिटर्न दाखिल नहीं करने पर कारोबारियों के ई-वे बिल ब्लॉक हो जाएंगे। जीएसटी कर प्रणाली में यह नया नियम 21 जून से लागू हो रहा है। सख्त माने जा रहे नए नियम से व्यवसासियों की परेशानी बढ़नी तय मानी जा रही है।

इसी बीच स्टेट टैक्स कमिश्नर ने जीएसटी से जुड़े इस नियम में कारोबारियों के लिए राहत भरी घोषणा की है। आदेश के जरिए ई-वे बिल ब्लॉक होने के प्रकरणों पर सुनवाई और राहत देने के अधिकार डिप्टी कमिश्नर, असिस्टेंट कमिश्नर और जॉइंट कमिश्नर को दे दिए हैं।

सोमवार को मप्र राज्य स्टेट टैक्स कमिश्नर डीपी आहूजा ने आदेश जारी कर जीएसटी के नियम 138ई के तहत विभागीय अधिकारियों को शक्तियां बांट दी। इसके तहत सभी सर्कलों के डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर या जॉइंट कमिश्नर द्वारा प्राधिकृत अधिकारियों को यह शक्ति दी गई है कि रिटर्न में नागा होने पर यदि ई-वे बिल ब्लॉक होता है तो ये अधिकारी प्रकरण की सुनवाई कर सकेंगे।

सुनवाई के बाद यदि उन्हें व्यवसायी द्वारा रिटर्न में देरी होने की बताई गई वजह उचित लगती है तो वे कुछ समय के लिए ई-वे बिल ब्लॉक करने की कार्रवाई में राहत देते हुए ई-वे बिल सुविधा शुरू करवा सकेंगे। इस दौरान संबंधित व्यापारी को अपने लंबित रिटर्न जमा करने की मोहलत दी जाएगी।

विभाग के जॉइंट कमिश्नर सुदीप गुप्ता के अनुसार इससे व्यापारियों को सुविधा मिलेगी। रिटर्न में देरी की तर्कसम्मत वजह होने पर संबंधित कारोबारी अपने सर्कल के ऐसे अधिकारी को आवेदन कर सकेगा। अब तक सिर्फ स्टेट टैक्स कमिश्नर के पास ही ये शक्तियां थीं।

मप्र टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एके लखोटिया के अनुसार जीएसटी विधान के अंतर्गत अब तक रिटर्न में देरी होने पर पेनल्टी तो वसूली जा रही है लेकिन ई-वे बिल की सुविधा ब्लॉक करने जैसा कड़ा प्रावधान लागू नहीं था। अब इसे लागू किया जा रहा है।

असल में व्यापारी को जिले के बाहर से माल मंगवाना हो या सप्लाई भेजना हो तो ई-वे बिल अनिवार्य है। अब नया नियम लागू हो रहा है इसके तहत दो महीने तक लगातार रिटर्न नहीं जमा किया तो ऐसे व्यवसायी की ई-वे बिल सुविधा ही ब्लॉक कर दी जाएगी।

कंपोजिशन में तिमाही रिटर्न दाखिल करने वाले कारोबारियों पर भी दो रिटर्न में देरी का नियम लागू होगा।

असल में ई-वे बिल जीएसटी पोर्टल से अपलोड किया जाता है। जीएसटी नंबर से ई-वे बिल सीधे जुड़ा होता है ऐसे में इस नियम के लागू होते ही रिटर्न में देरी करने वाले व्यवसायी ई-वे बिल डाउनलोड नहीं करने से जिले के बाहर से व्यापार करने में भी अक्षम हो जाएंगे।

इस सख्त नियम का असर ये होगा कि जानबूझकर लापरवाही करने वाले व्यवसायी अब संभल जाएंगे।

सोर्स : जागरण

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