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तीन रुपये प्रति किलो तक चीनी पर सेस लगाने की तैयारी

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चंडीगढ़ : चीनी के रेट गिरने के कारण देश भर के गन्ना उत्पादकों के फंसे 19,000 करोड़ रुपये देने के लिए केंद्र सरकार दो से तीन रुपये प्रति किलो का शुगर सेस लगा सकती है। जीएसटी काउंसिल की वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली मीटिंग में इस फैसले पर विचार किया जाएगा। पंजाब सरकार ने अपना स्टैंड अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि वह इसके पक्ष में है या नहीं। यह बैठक आज होगी।

जीएसटी काउंसिल की वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग आज

माना जा रहा है कि जिन राज्यों में गन्ने की पैदावार नहीं होती, वे राज्य शुगर सेस का विरोध कर सकते हैं। इस बैठक में यह भी तय किया जाना है कि क्या प्रथम स्‍तर पर ही सेस लगाया जाएगा या फिर इसको लगाने का कोई और तरीका खोजा जाए। यानी मिलों से चीनी बाहर निकलते ही उस पर प्रति किलो के हिसाब से सेस लगा दिया जाए और यह सेस एक अलग अकाउंट में डाला जाए ताकि सीधे किसानों के खातों में चला जाए।

19,000 करोड़ रुपये है गन्ना उत्पादकों की देनदारी, गैर गन्ना उत्पादक राज्य कर सकते हैं सेस का विरोध

यदि एक साल के आंकड़ों को देखा जाए तो चीनी की कीमतें गिरी है। अप्रैल 2017 में शुगर का रेट 4790 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन अब अप्रैल 2018 में 3900 रुपये रह गया है। गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य केंद्र सरकार ने 255 रुपये पिछले साल निर्धारित किया था उस पर विभिन्न राज्यों ने जो राशि बढ़ाई है उसको यदि मिला लिया जाए तो यह 310 रुपये से लेकर 350 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।

इसके चलते पूरे देश में शुगर मिलें घाटे में आ गई हैं क्योंकि एक क्विंटल गन्ने से 9 से 11 किलो चीनी ही निकलती है। यानी यदि औसत कीमत दस रुपये भी लगाई जाए तो चीनी के रेट से तो मात्र गन्ने की कीमत ही निकलती है। शुगर मिलों के अपने खर्चे, ब्याज को यदि मिला लिया जाए तो ये घाटे में आ जाती हैं। पूरे देश में इस समय विभिन्न शुगर मिलों द्वारा किसानों को 19000 करोड़ रुपये की पेमेंट करनी है।

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मिलों को घाटे से उबारने और किसानों को उनकी फसल की कीमत देने के लिए शुगर सेस एक जरिया निकाला गया है। दस दिन पहले केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राम विलास पासवान, भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मीटिंग भी हुई थी। इसमें किसानों को 19000 करोड़ रुपये की पेमेंट कैसे की जानी है, इस पर चर्चा की गई। इसमें तीन सुझाव आए जिनमें शुगर सेस लगाना, इथेनॉल पर जीएसटी की दर को 18 फीसद से कम करके 5 फीसद करना और किसानों को प्रोडक्शन लिंक्ड सब्सिडी मुहैया करवाना शामिल था।

उत्‍पादन ज्यादा, खपत कम

देश में इस समय गन्‍ने की पैदावार आैर चीनी का उत्‍पादन ज्यादा है और खपत कम है। देश भर में 29.8 मिलियन टन चीनी का उत्‍पादन होता है, जबकि खपत 25 मिलियन टन है। सरकार द्वारा चीनी पर आयात ड्यूटी बढ़ाकर और निर्यात को कम करके कीमतों को स्थिर करने की कोशिश की गई है। सरकार ने मिलों पर यह भी दबाव बनाया कि वे बीस लाख टन चीनी का निर्यात करें।

स्रोत: जागरण


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