लोहा गोदामों पर सेंट्रल एक्साइज का सर्वे

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मुजफ्फरनगर : मेरठ रोड स्थित तीन लोहा गोदामों पर करीब आधा दर्जन गाड़ियों में पहुंचे सेंट्रल एक्साइज एवं सीजीएसटी अधिकारियों के सर्वे की कार्यवाही प्रारंभ करने से व्यापारियों में अफरातफरी मच गयी। टीम के अधिकारियों ने गोदाम स्वामियों से क्रय-विक्रय का ब्योरा तलब कर जांच शुरू की।

सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के मेरठ रोड पर सरिया, एंगल तथा लोहे के अन्य सामान का उत्पादन करने वाले उद्योगपतियों के गोदाम हैं। सरिया व आयरन एंगल आदि के उत्पादन से जुड़े गोदामों पर बुधवार शाम सेंट्रल एक्साइज एवं सीजीएसटी विभाग के अधिकारियों ने पहुंचकर सर्वे की कार्यवाही प्रारंभ की। करीब आधा दर्जन बड़ी गाड़ियों में पहुंचे सेंट्रल एक्साइज एवं सीजीएसटी  के मेरठ और गाजियाबाद से आए अधिकारियों ने मेरठ रोड की गंगा स्टील, तायल स्टील तथा अजय स्टील आदि के लोहा गोदामों पर जांच शुरू की। गोदाम स्वामियों से उत्पादन तथा कच्चे माल की खरीदारी और माल के विक्रय की जानकारी ली गई। हालांकि सर्वे की कार्यवाही में जुटे अधिकारियों ने किसी प्रकार की जानकारी देने से इन्कार कर दिया। स्थानीय अधिकारियों ने बुधवार को सेंट्रल एक्साइज एवं सीजीएसटी की दूसरे जनपदों से आए अधिकारियों की टीमों के बारे में जानकारी होने से अनभिज्ञता जाहिर की। सेंट्रल एक्साइज एवं सीजीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर बिपिन कुमार ने बताया कि मेरठ रोड स्थित आयरन गोदामों पर सर्वे करने वाले अधिकारियों के बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है।

जमशेदपुर में करोड़ों के जीएसटी फर्जीवाड़े में 12 और नए कारोबारियों के नाम

वही दूसरी और जमशेदपुर में करोड़ों के जीएसटी फर्जीवाड़ा मामले में धंधेबाज कारोबारियों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। पहले से इस मामले में शहर के दस कारोबारी चिह्नित थे। अब इस सूची में 12 और नए कारोबारियों के नाम जुड़ गए हैं। आरोपित भाग न जाएं इसलिए विभाग ने अभी इनके नामों का खुलासा नहीं किया है। उधर, केंद्रीय जीएसटी (अन्वेषण) ने मंगलवार को गिरफ्तार राजस्थान के कारोबारी दिनेश व्यास को बुधवार को जेल भेज दिया है। आरोपित ने दस करोड़ रुपये इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया था। विभाग ने कहा है कि बहुत जल्द इसमें शामिल अन्य लोग भी दबोच लिए जाएंगे।

उपनिदेशक जीएसटी (अन्वेषण) गौतम कुमार आई.आर.एस., ने बुधवार को बताया कि जीएसटी फर्जीवाड़े में दैनिक जागरण ने जिन दस कारोबारियों के नाम का खुलासा किया है, जांच में उसके अलावा 12 और नए नाम भी सामने आए हैं। यह एक बहुत बड़ा रैकेट है, जो बिहार, झारखंड, प. बंगाल, ओडिशा समेत पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों में फर्जी नाम से जीएसटी निबंधन कराकर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था। विभाग ने रैकेट को खंगाल लिया है। बस उनकी गिरफ्तारी बची है। उनकी टीम खुफिया तरीके से लगी है। रैकेट में शामिल कोई भी नहीं बचेगा। चाहे वह कितना भी बड़ा आदमी होगा, गिरफ्तार होगा। कहा-इन लोगों ने न केवल विभाग को धोखा दिया है, बल्कि जीएसटी सिस्टम को बदनाम करके देश की छवि को धूमिल की है।

जीएसटी विभाग के अनुसंधान में यह बात सामने आयी है कि प्रदीप सिंह व दिलीप सिंह ही गिरोह का सरगना है। इन्होंने पैसे का लालच देकर छोटे-मोटे लोगों को अपने गिरोह में शामिल कर लिया, जिन्होंने कुछ बड़े कारोबारियों को भी लालच में फंसा लिया था। इसमें कुछ ऐसे कारोबारियों ने भी फर्जी बिल ले लिया था, जिन्हें झांसा दिया गया था कि उन्हें बैठे-बैठे इनपुट टैक्स क्रेडिट में बड़ी रकम मिल जाएगी। इसके लिए उनसे 10 फीसद रकम पर फर्जी बिल-इन्वायस उपलब्ध कराया गया।

फर्जीवाड़ा गिरोह ने योजनाबद्ध तरीके से ना केवल अलग-अलग राज्यों को चुना, बल्कि पांच-छह लेयर में पूरे खेल को अंजाम दिया। बिना वास्तविक लेन-देन किए एक से दूसरे फर्म के नाम पर बिन-इन्वायस काटे गए। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि एक राज्य को दूसरे राज्य का डिटेल मिलने में आसानी ना हो। गिरोह मानकर चल रहा था कि इस परेशानी से बचने के लिए कोई न कोई राज्य इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान कर देगा। पांच फर्मो या कंपनियों का लेनदेन भी अलग-अलग राज्यों-स्थानों के माध्यम से किया गया, ताकि जब तक विभाग को पता चले, उनके खाते में ऑनलाइन भुगतान हो जाए। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। उन्हें नहीं मालूम था कि पूरे सिस्टम को क्रासचेक करने पर फर्जीवाड़ा पकड़ा जाएगा। जुलाई से सितंबर तक, जब तक जीएसटी सिस्टम दुरुस्त नहीं हुआ, खेल चला। अब एक-एक करके पकड़े जाएंगे, कोई नहीं बचेगा।

स्रोत: जागरण

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