कोई भी जीएसटी विभाग कर सकता है जांच

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने साफ किया है कि टैक्स चोरी की सूचना मिलने पर कोई भी जीएसटी विभाग किसी भी टैक्सपेयर के खिलाफ एन्फोर्समेंट, जांच, जब्ती, नोटिस और अपील की कार्रवाई कर सकती है, चाहे वो टैक्सपेयर केंद्र के अधिकार क्षेत्र में हो या राज्य के। हालांकि इस बारे में महीनों से चली आ रही दुविधा पर जीएसटी काउंसिल ने भी निर्देश जारी किए थे, लेकिन उसमें अस्पष्टता होने के चलते इंडस्ट्री और प्रशासन में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।

सीबीआईसी के स्पेशल सेक्रेटरी महेंदर सिंह ने केंद्र और राज्यों के शीर्ष जीएसटी अधिकारियों को पत्र लिखकर इस बारे में विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है। इसमें कहा गया है कि केंद्रीय और राज्य स्तरीय दोनों तरह के जीएसटी प्राधिकरण या अधिकारी गोपनीय सूचनाओं के आधार पर एन्फोर्समेंट की कार्रवाई शुरू कर सकते हैं, चाहे टैक्सपेयर किसी के भी अधिकार क्षेत्र में क्यों न आता हो। एक्शन लेने वाली अथॉरिटी को यह अधिकार भी होगा कि वह जांच की प्रक्रिया पूरी करे, नोटिस जारी करे, रिवकरी और जरूरत पड़ने पर अपील भी कर सके।

जीएसटी काउंसिल ने सफाई मांगे जाने पर केंद्र और राज्य अधिकारियों को ‘पूरी वैल्यू चेन’ में इंटेलिजेंस बेस्ड एन्फोर्समेंट एक्शन के लिए अधिकृत किया था। हालांकि, अब तक अधिकारी एक दूसरे के अधिकार क्षेत्रों का अतिक्रमण करने से बचते थे। कई मामलों में टकराव की स्थिति भी बन रही थी। ताजा निर्देश में कई आशंकाओं का समाधान करते हुए यह भी कहा गया है कि अगर कोई केंद्रीय अधिकारी राज्य के अधिकार क्षेत्र वाले टैक्सपेयर खिलाफ जांच की कार्रवाई शुरू करता है तो जरूरी नहीं कि वह इस केस को राज्य अधिकारियों को सौंप दे। वह खुद इसे अंजाम तक पहुंचाएगा। ऐसा ही अधिकार केंद्रीय अधिकार क्षेत्र में आने वाले टैक्सपेयर्स के खिलाफ राज्य जीएसटी अधिकारियों को भी होगा। अधिकारियों को सूचित किया गया है कि जल्द ही जीएसटीएन इस बारे में एक आईटी सिस्टम विकसित कर लेगा, जिससे कार्रवाइयों को प्रोसेस करना आसान हो जाएगा।

देश भर में रजिस्टर्ड जीएसटी टैक्सपेयर्स को एक खास फॉर्मूले के तहत केंद्र और राज्य के अधिकारक्षेत्र में बांटा गया है। 1.5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले 90% कारोबारियों को राज्य के प्रशासनिक नियंत्रण में रखा गया है, जबकि इससे कम टर्नओवर वालों को 50-50 पर्सेंट के अनुपात में बांटा गया है। डीलर्स की शिकायत रही है कि अगर उनका असेसमेंट कोई एक अथॉरिटी देखती है, तो जांच-जब्ती का अधिकार दूसरी अथॉरिटी को नहीं मिलना चाहिए।

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